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Satta mataka 143 क्या है और कब शुरू हुआ

कल्याणजी भगत गुजरात में रहते थे और पेशे से एक किसान थे,1962 के आस पास कल्याणजी भगत ने worli matka नामक सट्टे की शुरुआत की, उन्होंने एक मटका लेकर उसमे कई सारी पर्ची लिखकर उसमे डाल दी, उसके बाद एक पर्ची को निकाल कर उसे विजेता घोषित कर दिया | उसके बाद 1964 में रतन खत्री ने Satta Matka के कुछ नियमों में बदलाव करते हुए New Worli Matka की शुरुआत की थी. शुरुआत से ही Satta matka केवल सोमवार से शुक्रवार ही चलता है | भारत में सट्टा सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में खेला जाता है और लगभग सभी satta matka का संचालन वही से होता है | वैसे तो सट्टा इंडिया में पूरी तरह से बैन है लेकिन online सट्टा आज भी जोरो शोरो से चल रहा है,सट्टा एक ऐसा खेल है जिसमे किस्मत और सही नंबर का पता होना बहुत जरुरी होता है | आपकी किस्मत आपके साथ है तो आप भिखारी से राजा बन सकते हो नहीं तो राजा से भिखारी बनने में ज्यादा समय नहीं लगता है.
Sattamataka143 क्या है?शुरुआत में worli matka नामक सट्टा शुरू हुआ था,फिर New Worli Matka शुरू हुआ,जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे नये नये सट्टे की कंपनी शुरू हो गई | boss matka, golden matka, Kalyan…